23 जुलाई 2025: हरिद्वार में काँवरियों की एस्थेटिक यात्रा का चरम सौंदर्य
🌅 सुबह की शुरुआत: नारंगी रंग में रंगा हरिद्वार
आज 23 जुलाई 2025 को हरिद्वार की सुबह कुछ अलग ही थी। सूरज की पहली किरण के साथ ही गंगा किनारे नारंगी वस्त्रों से सजी काँवरियों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर की पौड़ी पर गूंजते "बोल बम!" के नारों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
हर रास्ता, हर गली, हर पुल पर काँवरिये दिखाई दिए — कुछ नंगे पाँव, कुछ झूमते हुए, और कुछ हाथ जोड़कर गंगाजल लेने के लिए पंक्तिबद्ध।
🚶♂️ आस्था का कारवां: हजारों काँवरिये, एक ही लक्ष्य
हरिद्वार में आज करीब 10 लाख से अधिक काँवरिये पहुँच चुके हैं। NH-58 हाईवे से लेकर भीमगौड़ा और नीलधारा तक – हर जगह काँवरियों की कतारें चल रही हैं।
कई टोलियों ने काँवर को फूलों, त्रिशूल, तिरंगे और शिव-शक्ति के चित्रों से सजाया है — यह दृश्य भक्ति और सौंदर्य का अद्भुत मेल बनाता है।
🕉️ ध्वनि की ऊर्जा: ढोल, भजन और DJ काँवर
हर तरफ से आ रही आवाजें — कहीं ढोल की थाप, कहीं "बम-बम भोले" के नारे, तो कहीं DJ वाले काँवर से भक्ति गीत।
प्रशासन ने DJ काँवर पर कुछ नियंत्रण किया है, फिर भी कई जगहों पर भक्ति में डूबी लहर दिखाई दी।
💧 गंगा घाटों पर भीड़: पवित्र जल के लिए लंबी कतारें
हर की पौड़ी, ब्रह्मकुंड और सुभाष घाट जैसे स्थानों पर सुबह 4 बजे से ही भीड़ लगनी शुरू हो गई थी।
काँवरिये स्नान कर गंगाजल भरने के लिए कतारों में खड़े थे। कई स्वयंसेवक जल, फल, दवाइयां वितरित करते दिखे।
📸 हरिद्वार का एस्थेटिक आज: रंग, रौशनी और रूह
आज हरिद्वार एक रंगीन चित्रकला जैसा लग रहा था:
- नारंगी वस्त्रों की झलक
- फूलों और लाइट्स से सजी काँवर
- गंगा में तैरते दीप
- शिव नाम के नारे
यह सब मिलकर एक spiritual aesthetic canvas बना रहे थे — जिसे सिर्फ आंखों से नहीं, आत्मा से महसूस किया जा सकता है।
🚨 प्रशासन की व्यवस्था: सुरक्षा और सेवा दोनों
हरिद्वार पुलिस, SDRF और स्वास्थ्य टीमों ने अतिरिक्त बल तैनात किया। CCTV निगरानी, मेडिकल टेंट्स और भंडारे हर मार्ग पर सक्रिय रहे।
स्थानीय लोग और NGOs काँवरियों की सेवा में लगे रहे — यह समाज की एकजुटता का सजीव उदाहरण है।
📿 निष्कर्ष: 23 जुलाई – काँवरियों की आस्था का उत्कर्ष
आज का दिन सिर्फ काँवर यात्रा का एक पड़ाव नहीं था — यह था श्रद्धा का उत्सव, सौंदर्य का अनुभव और भक्ति की शक्ति का प्रमाण।
हरिद्वार आज एक जीवित आध्यात्मिक महोत्सव जैसा महसूस हो रहा है।
✍️ लेखक का संदेश
यदि आप आज हरिद्वार में नहीं हैं, तो शब्दों के माध्यम से उस माहौल को महसूस करें — और अगर हैं, तो आंखें बंद कर "बोल बम" कहते हुए उस ऊर्जा को आत्मसात करें।